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COVID-19 दूसरा लहर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कोरोना वायरस की दूसरी लहर तेज़ी से फैल रही है?

भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर बहुत तेज़ी से फैल रही है। अप्रैल 2021 के पहले 15 दिनों में भारत में औसतन 1 लाख नए कोविड-19 के मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट किए गए मामलों की कुल संख्या पहली लहर में रिपोर्ट किए गए मामलों से लगभग दोगुनी है।

कोरोना वायरस के मामले क्यों बढ़ रहे हैं; कमी कहाँ हो रही है?

भारत में कोविड-19 के मामले फिर से सामने आ रहे हैं। इस वायरस के तेजी से फैलने के कई कारण हैं जिनमें से कुछ ये हैं:

● ढिलाई: कोविड-19 के मामलों में बढ़ोत्तरी का सबसे बड़ा कारण कोविड-19 गाइडलाइन्स का पालन करने में ढिलाई है। मास्क ना पहनना या सार्वजनिक स्थानों पर सामाजिक दूरी ना बनाए रखने के कारण बहुत लोगों को इन्फेक्शन हो गया है।

● वायरस का वेरिएंट: कोविड-19 की दूसरी लहर कोरोना वायरस के नए वेरिएंट की वजह से आई है। यह वेरिएंट पहले वाले वायरस से ज़्यादा इन्फेक्शयस है।

● रोकने के उपायों को असरदार तरीके से लागू करने में कमी: ज़्यादा रिस्क वाले क्षेत्रों तथा कन्टेनमेंट ज़ोन में सरकार लॉकडाउन या प्रतिबंध जैसे उचित प्रोटोकॉल को लागू नहीं कर पा रही है जिसकी वजह से इन क्षेत्रों में कोविड-19 तेज़ी से फ़ैल रहा है। 

कोरोना वायरस इन्फेक्शन के फैलाव को ट्रैक करने के ग्राफ कर्व को फ्लैट कैसे करें? 

किसी भी देश या राज्य में महामारी या किसी बीमारी के फैलने को सरकार एक ग्राफ की मदद से ट्रैक करती है है। ग्राफ पर जो कर्व होता है वह वायरस के फैलने और लोगो को इन्फेक्ट करने की स्पीड को दिखाता है। कोविड-19 के कर्व को फ्लैट करने का मतलब है कि वायरस के  फैलने और लोगो को इन्फेक्ट करने के टाइम को बढ़ाना। कुछ तरीके जिनसे हम कर्व को फ्लैट कर सकते हैं नीचे दिए गए हैं:

● गाइडलाइन्स फॉलो करें: बाहर जाते समय मास्क पहनें, हाथों को नियमित रूप से धोएं तथा दूसरों से 6 फीट की दूरी बनाकर रखें।

● टैस्ट करवाएं: यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आते हैं, जो कोविड पॉजिटिव है या उसे कोविड के लक्षण हैं, तो अपना टैस्ट कराएं।

● बाहर निकलने से बचें: वायरस के फैलाव को काबू करने के लिए लोगों से कम संपर्क करना सबसे अच्छा तरीका है। यदि बहुत ज़रूरी न हो तो अपने घर से बाहर ना निकलें।

● वैक्सीन लगवाएँ: कोविड-19 के लिए सरकार ने कोवैक्सीन और कोविशील्ड नामक दो वैक्सीन मंज़ूर की हैं। रूस द्वारा निर्मित वैक्सीन स्पुतनिक-वी भी जल्द लॉन्च की जाएगी। वायरस के फैलाव को काबू करने के लिए अपने निकटतम सरकारी-अधिकृत केंद्र पर वैक्सीन लगवाएँ।

कोविड-19 की सेकंड लहर को कैसे समझाएंगे?

भारत में कोविड-19 पिछले कई दिनों से लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है। इस महीने देश में 16 मिलियन से अधिक मामले सामने आए हैं। देश में तेज़ी से बढ़ रही कोरोना वायरस की दूसरी लहर को निम्नलिखित तरीके से एक्सप्लेन कर सकते हैं:

● कोविड-19 की दूसरी लहर कोविड-19 वायरस में परिवर्तन के कारण आई है। यह परिवर्तन पहले वाले वायरस की तुलना में ज़्यादा इन्फेक्शयस और जानलेवा हैं।

● महाराष्ट्र, पंजाब, केरल, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ को मिलाकर कुल केस 80 प्रतिशत से ज़्यादा हैं ।

● कोरोना वायरस की दूसरी लहर उस समय आई है जब टीकाकरण शुरू हो चुका है। जिसके कारण सरकार ने अप्रैल में 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया, और अब 1 मई से यह सुविधा 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए भी उपलब्ध होगी । 

क्या कोविड-19 2.0 के कोई नए लक्षण हैं?

कोविड 2.0 के कुछ नए लक्षण इस प्रकार हैं:

● मांसपेशियों में तेज दर्द

● पेट में दर्द

● आँखों में जलन 

● आँखें गुलाबी हो जाना – कंजक्टीवाइटिस (पलकों में सूजन)

● अनियमित दिल की धड़कन, घबराहट होना 

● नौसिया (जी मिचलाना)

● उल्टी होना

● उंगली और पैर के अंगूठे का रंग बदलना 

● गले में खराश और लगातार खांसी 

● ब्रेन फॉग, लंबे समय तक फोकस न कर पाना 

अगर आप ऊपर लिखे किसी भी लक्षण का अनुभव कर रहे हैं, तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें।

वैक्सीन की दोनों डोज़ लेने के बाद भी लोगों को इन्फेक्शन क्यों हो रहा है?

कोई भी वैक्सीन 100 प्रतिशत प्रभावी नहीं है कि पूरी इम्युनिटी दे सके। यह समझना ज़रूरी है कि इन वैक्सीन का प्रभाव केवल 95 प्रतिशत है जिसका मतलब वैक्सीन लगवाने के बाद भी आपको इन्फेक्शन हो सकता है ।

इसकी संभावनाएं बहुत कम हैं, जबकि कुल आबादी का लगभग 0.03-0.04% लोगों को वैक्सीन लगाई गई है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि इन्फेक्शन होने पर लक्षणों का असर कम होगा तथा बीमारी जानलेवा नहीं बनेगी।

इसलिए, कोविड -19 के फैलाव को कंट्रोल करने के लिए वैक्सीनेशन सबसे प्रभावी उपाय है, और हम सभी को सही समय पर अपना डोज़ लेकर वायरस को कंट्रोल करने में अपना सहयोग देना चाहिए।

अगर मुझे कोविड-19 के लक्षण हैं लेकिन मेरा टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव है, तो मुझे क्या करना चाहिए? क्या मुझे तीन दिन बाद फिर से आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाना चाहिए?

आरटी-पीसीआर टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि आपको इंफेक्शन नहीं हुआ है। एक गलत नेगेटिव रिपोर्ट कई कारणों से आ सकती है जिसमे गलत स्वैब टेस्ट करना, वायरस का सैंपल कम होना, पीसीआर में गलती या टेस्ट सैंपल में खराबी होना शामिल हैं।

टेस्ट करवाने की टाइमिंग पर भी अक्सर कोविड -19 की नेगेटिव रिपोर्ट आना निर्भर करता है। इसलिए वायरस या इन्फेक्टेड लोगों के संपर्क में आने के 5-6 दिन बाद टेस्ट करवाना चाहिए। अगर नेगेटिव रिपोर्ट आने के बाद भी लक्षण रहते हैं तो पहले दिन के हिसाब से तीन दिन बाद आरटी-पीसीआर टैस्ट कराएं।

एक गलत नेगेटिव रिपोर्ट दूसरों में इन्फेक्शन फैलने का कारण हो सकती है। इसलिए भले ही रिपोर्ट नेगेटिव हो, इन्फेक्शन के फैलाव को रोकने के लिए निचे दिए गए क्वारंटाइन नियमों का पालन करें:

● मास्क पहनना

● सेल्फ-आइसोलेशन 

● सामाजिक दूरी बनाना 

● हाथ की सफाई रखना 

● स्वस्थ आहार खाना 

● नए लक्षणों पर नजर रखना

अगर आपको कोविड-19 के लक्षण हैं लेकिन टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव है, तो भी यह संभव है की आप दूसरे स्वस्थ लोगों में इन्फेक्शन फैला रहे हैं। इसलिए जल्द-से-जल्द मेडिकल हेल्प लें ताकि आपका इलाज समय पर शुरू हो सके।

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आरटी-पीसीआर टेस्ट कितना सही है?

कई रिसर्चरों ने कहा है कि रिवर्स ट्रांसक्रिपटेस पीसीआर टेस्ट यह बताता है कि किसी व्यक्ति को कोरोना है या नहीं। लेकिन लेबोरेटरी में टेस्टिंग स्थिति, अन्य लॉजिस्टिक कारक, लक्षणों की अवधि, वायरल लोड और टेस्ट सैंपल गुणवत्ता के आधार पर, अलग-अलग परिणाम सामने आ रहे हैं।

रैपिड एंटीजन असेसमेंट (RAT) या को-रेड्स (CO-RADS) स्कोर जैसे कई अन्य ऑप्शन हैं, लेकिन आरटी-पीसीआर फाइनल रिजल्ट के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।

रियल-टाइम आरटी-पीसीआर टेस्ट में गलत नेगेटिव तथा गलत पॉजिटिव रिपोर्ट आने की दिक्कत है। लेकिन यह टेस्टिंग में अभी भी सबसे सही माना जाता है।

इसके अलावा, रियल-टाइम आरटी-पीसीआर टेस्ट में इन्फेक्शन को जल्दी पहचानने की क्षमता है। इसलिए, मानदंडों के अनुसार रियल-टाइम आरटी-पीसीआर टेस्ट ही कोविड-19 करने वाले एजेंट को पहचानने का मुख्य तरीका है। 

अगर आरटी-पीसीआर टेस्ट पॉजिटिव है तो सीओ-रेड्स (CO-RADS) स्कोर की क्या मान्यता है?

कई रिसर्चरों ने कहा है कि रिवर्स ट्रांसक्रिपटेस पीसीआर टेस्ट यह बताता है कि किसी व्यक्ति को कोरोना है या नहीं। लेकिन लेबोरेटरी में टेस्टिंग स्थिति, अन्य लॉजिस्टिक कारक, लक्षणों की अवधि, वायरल लोड और टेस्ट सैंपल गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए यह टेस्ट भरोसेमंद नहीं है। साथ ही, रिपोर्ट आने में बहुत समय लगता है। 

द कोरोनावायरस डिसीज़ 2019 रिपोर्टिंग और डेटा सिस्टम (CO-RADS) चेस्ट सीटी स्कैन से पल्मोनरी इन्वॉल्वमेंट के स्तर को समझने के लिए एक टेस्ट है। यह इन्फेक्शन को बहुत अच्छी तरह से जाँचता है, खासकर उन लोगो में जिनके लक्षण गंभीर या मीडियम होते हैं। जिस व्यक्ति को कोविड-19 है तथा फेफड़ों में दिक्कत है, उनमें CO-RADS टेस्ट चेस्ट सीटी स्कैन रिपोर्ट को अलग-अलग हिस्सों में विभाजित करके आकलन करने की सुविधा देता है। यह सिस्टम मीडियम से गंभीर ​​बीमारी वाले मरीज़ो पर टेस्ट किया गया था।

क्या हमे आरटी-पीसीआर के रिजल्ट में सीटी वैल्यू (वायरल लोड) पर ध्यान देना चाहिए?

साइकल थ्रेशोल्ड (सीटी) वैल्यू या वायरल लोड यह बताता है कि एक इन्फेक्टेड व्यक्ति के सैंपल में वायरस की कितनी मात्रा मौजूद है। सीटी वैल्यू का मतलब यह भी है कि टेस्ट से पहले इसने कितनी साइकिल (चरण) पूरी की है। सी.टी. वैल्यू जितनी कम होगी, वायरल लोड और इन्फेक्शन का खतरा उतना ही ज़्यादा होगा।

अध्ययनों के अनुसार, इन्फेक्शन के शुरुआती चरण में, सी.टी. वैल्यू 30 या 20 से कम होती है जो  वायरस की ज़्यादा मात्रा को दर्शाती है।

सीटी वैल्यू आपको वायरस की गंभीरता को समझने में मदद कर सकती है। हालाँकि, उपचार इस वैल्यू के आधार पर नहीं होना चाहिए। ज़्यादा सीटी वैल्यू कम वायरल लोड बताती है लेकिन उपचार और अस्पताल में भर्ती करना केवल हर व्यक्ति की हालत और लक्षणों की गंभीरता पर आधारित होना चाहिए।

क्या सीटी स्कैन और आरटी-पीसीआर में सीटी मूल्य सेम होती है?

आरटी-पीसीआर टेस्ट सैंपल में कोरोना वायरस की जाँच का एक ऊँचे दर्जे का टेस्ट है। साइकिल थ्रेसहोल्ड (सीटी वैल्यू) का मतलब यह है कि टेस्ट से पहले इतने कितनी साइकिल (चरण) पूरी की है।

दूसरी तरफ, कम्प्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन टिपिकल जाँच फ़ीचर्स से कोविड का पता लगाने में मदद कर सकता है। इसलिए सीटी स्कैन आरटी-पीसीआर टेस्ट से ज़्यादा सही तरीके से एक व्यक्ति में इन्फेक्शन की गंभीरता और उसके अंगों को पहुँचे नुकसान का आकलन करने में मदद कर सकता है। 

डबल म्यूटेंट वायरस क्या है और क्या आपको इसकी टेंशन लेनी चाहिए?

प्रकृति में मौजूद हर एक वायरस में समय-समय पर परिवर्तन होते हैं। इसे म्यूटेशन कहा जाता है। जब किसी वायरस में परिवर्तन होता है, तो वह या तो अपना आकार बदलता है या एक नए वेरिएंट का रूप ले लेता है। कुछ परिवर्तन वायरस को कमजोर बनाते हैं जबकि कुछ इसे मजबूत बना सकते हैं।

पिछले साल के कोरोना वायरस ने भी म्यूटेशन के बाद डबल म्यूटेंट वायरस बनाया है। इसका मतलब है कि अब कोरोना वायरस के दो वेरिएंट एक साथ इन्फेक्शन फैला रहे हैं।

B.1.617 के नाम से जाना जाने वाला यह डबल म्यूटेंट वायरस शुरुआत में भारत में दो म्यूटेशन- E484Q और L452R के रूप में पाया गया था। यह नया म्यूटेशन बहुत ज़्यादा इन्फेकशयस है और भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर के लिए ज़िम्मेदार है।

 हालांकि, उचित सावधानी बरतने और वैक्सीन लगवाने से इस वायरस के फैलाव को कम करने में मदद मिलेगी।

आरटी-पीसीआर टेस्ट की गलत नेगेटिव रिपोर्ट का क्या अनुपात है?

आरटी-पीसीआर टेस्ट एक सैंपल में कोरोना वायरस की जाँच करने के लिए किया जाता है। भारत में उपयोग की जाने वाली आरटी-पीसीआर टेस्ट किट दो से अधिक जीनों की जाँच करती हैं ताकि वायरस की जाँच में कोई गलती न हो क्योंकि ऐसा हो सकता है कि म्यूटेशन के दौरान वायरस ने अपने जीन की पहचान बदल ली हो।

हालाँकि, इन टेस्ट की संवेदनशीलता पहले के समान लगभग 70% है। इसका मतलब यह है कि टेस्ट से वायरस का पता न लगा पाने और गलत नेगेटिव रिपोर्ट आने की 30% संभावना है।

गलत नेगेटिव रिपोर्ट कोविड-19 का सैंपल लेते समय या टेस्ट करते समय हुई किसी गलती के कारण भी आ सकती है। तथा अगर कोई व्यक्ति इन्फेक्टेड होने के बाद जल्दी टेस्ट करवा लेता है तो वायरल लोड कम हो सकता है जिसकी वजह से टेस्ट में वायरस की जाँच नहीं हो सकती।

आरटी-पीसीआर टेस्ट कई बार इन्फेक्शन क्यों नहीं जाँच पाते?

आरटी-पीसीआर टेस्ट सैंपल में कोरोना वायरस की जाँच का एक ऊँचे दर्जे का टेस्ट है। यह टेस्ट इन्फेक्शन की जाँच सुर उपचार के लिए ज़रूरी है। हालाँकि, कई कारणों से इन्फेक्शन की जाँच करना मुश्किल हो सकता है जो कि निम्नलिखित हैं:

● टेस्ट का सही होना: कोई भी टेस्ट 100 प्रतिशत सही नहीं होता है । आरटी-पीसीआर टेस्ट में 70 प्रतिशत की संवेदनशीलता है और कभी-कभी यह गलत नेगेटिव रिपोर्ट दे सकता है।

● टेस्ट करवाने का समय: यदि आप वायरस के संपर्क में आने के बाद जल्दी जाँच करवा लेते हैं, तो टेस्ट वायरस की जाँच नहीं कर पाता।

● कम वायरल लोड: यदि वायरल लोड कम है, तो हो सकता है कि टेस्ट में वायरस ना दिखाई दे।

● सैंपल लेने या संभालने में चूक: स्वाब स्टिक डालने, सैंपल को स्टोर करने में या ले जाने में हुई किसी गलती की वजह से टेस्ट रिजल्ट पर असर पड़ सकता है।

कोविड-19 की अलग अलग स्टेज क्या हैं?

कोविड-19 के लक्षणों की गंभीरता के आधार पर तीन स्टेज में बांटा गया है।

नोवल कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के छींकने, खांसने या बात करने पर उसके मुंह से निकली ड्रॉपलेट्स से फैलता है।

पहले फेज में, वायरस शरीर के भीतर जाता है और तेजी से मल्टीप्लाई होना शुरू हो जाता है। इससे व्यक्ति को सामान्य सर्दी जुकाम और हल्के बुखार जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।

दूसरे फेज यानि पल्मनरी फेज में इससे आपके इम्यून सिस्टम पर खराब असर पड़ता है और आपको रिस्पाइरेट्री सिस्टम के शुरूआती लक्षण महसूस होना शुरू होते हैं जैसे, सांस फूलना, ऑक्सीजन का स्तर गिरना और बलगम। फेज 2 में ब्लड क्लॉटिंग (खास तौर पर ब्लड क्लॉट्स का डेवलपमेंट) की समस्या भी ज्यादा देखने को मिलती है। 

तीसरा फेज (हाइपरइंफ्लेमेट्री फेज) तब आता है जब हाइपर ऐक्टिव इम्यून सिस्टम किडनी, ह्रदय या अन्य किसी अंग को नुकसान पहुंचाता है। हाइपर इंफ्लेमेटरी फेज में, जैसा एक अध्ययन बताता है, ‘cytokine storm’ की स्थिति बनती है (जब आपका शरीर अपने ही टिशू पर आक्रमण करने लगता है)। हालांकि संक्रमण की तीनों स्टेज ओवरलैप कर सकती हैं, इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण की हर स्टेज को पहचानना जरूरी है। हालांकि, जरूरी नहीं हर व्यक्ति इन सभी स्टेज का अनुभव करें।

कोविड-19 के उपचार के लिए कौन सी दवाइयां और थेरेपी का इस्तेमाल किया जा रहा है?

बहुत सारे लोग जिन्हें कोविड-19 हुआ है और उनमें हल्के लक्षण हैं वो घर पर ठीक हो सकते हैं। वहीं, गंभीर लक्षणों वाले लोगों के लिए तमाम दवाइयां और उपचार मौजूद हैं जिससे वायरस को बढ़ने से रोका जा सके। वह इस प्रकार हैं :

  • रेमडेसिविर (Remdesivir) : यह एक एंटी वायरल दवा है जो अस्पताल में मरीज को जल्द ठीक होने में मदद करती है।
  • टॉइलिजुमब (Tocilizumab) : इसे “off-label” ड्रग के तौर पर मान्यता मिली है और ये कोविड-19 के मरीजों में इम्यून सिस्टम में इन्फ्लेमेशन को कम करती है।
  • डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) : ये एक कोर्टिकोस्टीरॉएड है जो कोविड-19 मरीजों में मृत्यु की संभावना को कम करती है। इसका इस्तेमाल केवल गंभीर और वेंटिलेटर वाले मरीजों के लिए किया जा सकता है। हल्के लक्षणों वाले मरीजों को इसकी जरूरत नहीं है। ये ड्रग कोविड की वजह से होने वाले हाइपरएक्टिव इम्यून रिस्पांस को नियंत्रित करती है। 
  • एंटीबायोटिक्स (Antibiotics : एंटीबाएटिक जैसे अज़िथ्रोमीसिन (Azithromycin) और लवेरमेक्टिन (Ivermectin) का इस्तेमाल बैक्टीरियल संक्रमण को ठीक करने के लिए किया जाता है।
  • प्लाज्मा थैरेपी (Plasma therapy) : जिन लोगों को कोविड-19 हुआ और वो ठीक हो गए उनके खून में एंटी बॉडीज बन जाती हैं, ऐसे लोग कोविड-19 के मरीजों के लिए रक्तदान कर सकते हैं। ब्लड सेल हटाकर मिलने वाला लिक्वेड या प्लाज्मा लोगों को इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है जिससे वायरस से लड़ा जा सके।

नोट : कोविड-19 के सभी मरीजों को इन सारी दवाइयों की जरूरत नहीं पड़ती है। कई लोग बुखार, बदन दर्द का इलाज और अच्छा आराम करके केवल लक्षणों का उपचार करने पर ठीक हो सकते हैं। कृपया ऊपर दी गई कोई भी दवाई बिना चिकित्सकीय सलाह के न लें। और जरूरत न पड़ने पर इनका संचय भी न करें।

क्या रेमडेसिविर (REMDESIVIR) मरने से बचाता है? इसे कब लेना चाहिए?

सभी वायरस में डीएनए या आरएनए के रूप में जेनेटिक मटेरियल होता है। कोरोना वायरस आरएनए वायरस है जो अपने आपको इंसान के सेल से चिपका देता है और उसके अंदर अपनी कॉपी बनाना शुरू कर देता है।

 रेमडेसिविर (REMDESIVIR) एक जरूरी एंटीवायरस ड्रग है जो शरीर में वायरस की रेप्लिका बनने से रोकता है। ये उन एंजाइम्स को बनने से रोकता है जो इस वायरस की कॉपी बनाते हैं, इससे शरीर में कोरोना वायरस बढ़ नहीं पाता है।

आईसीएमआर ( इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) के अनुसार रेमडेसिविर (REMDESIVIR) उन मरीजों को देना चाहिए जो गंभीर रूप से बीमार हैं, हल्के और मध्यम लक्षणों वाले मरीजों को इसकी जरूरत नहीं है। अगर संक्रमण होने के 10 दिनों के अंदर ये दवा दी जाए तो इसके बेहतर नतीजे सामने आते हैं, बाद में इस दवा का कोई असर नहीं होता।

 रेमडेसिविर (REMDESIVIR) अब तक कोरोना वायरस फैलने से रोकने में कारगर रही है, फिर भी ये मृत्यु दर को घटाने में सक्षम नहीं है। मध्यम से गंभीर लक्षणों वाले मरीजों में इस दवा को लेने से सुधार देखा जा सकता है।

इम्यूनिटी बढ़ाने के सबसे आसान तरीके क्या हैं?

1 संतुलित आहार : अपने भोजन में हर तरह के विटामिन और मिनरल शामिल करने की कोशिश करें। कोविड-19 से बचाव के लिए खास तौर पर विटामिन सी और डी युक्त भोजन की मात्रा बढ़ाएं। हरी सब्जियां और फलों का सेवन करते रहें। एनर्जी के लिए प्रोटीन और कर्बोहाइड्रेट भी भरपूर मात्रा में लें।

2 अपनी रोजाना की दिनचर्या को नीचे दिए गए तरीकों से सुधारें :

  • संक्रमण और रोगों से बचने के लिए कम से कम 8 घंटे की नींद लें
  • दिमाग स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कम से कम 20 मिनट तक ध्यान करें। ध्यान से आपका ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट नियंत्रित रहता है जिससे एंग्जाइटी कम होती है।
  • योगा और व्यायाम करने से सांस लेने की क्षमता बढ़ती है साथ ही संक्रमण से लड़ने के लिए इम्यूनिटी भी बढ़ती है। स्वस्थ लंग्स के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज करना न भूले ।

3 सकारात्मक बने रहें : ऐसा कहा गया है कि हम वही अनुभव करते हैं जिसके बारे में विचार करते हैं। इसलिए जितना हो सके सकारात्मक रहें, क्योंकि स्वस्थ मन से ही स्वस्थ शरीर बनता है।

मरीज को किस वक्त अस्पताल जाना चाहिए?

अगर आपका ऑक्सीजन लेवल गिर रहा है और आपको सांस लेने में समस्या महसूस होती है, सीने में लगातार दर्द और दबाव महसूस होता है, बोलने और हिलने में समस्या या रुकावट महसूस होती है और दवाइयां लेने के बाद भी तेज बुखार बना रहता है तो आपको अस्पताल जाने की जरूरत है।

हल्के कोविड-19 के बाद कौन से लॉन्ग कोविड लक्षणों पर गौर करना चाहिए?

लॉन्ग कोविड को पोस्ट कोविड, पोस्ट अक्यूट कोविड, लॉन्ग-टेल कोविड और लॉन्ग-हॉल कोविड भी कहा जाता है। यह वो परिस्थिति होती है जब कोविड का असर संक्रमण होने से लंबे समय तक बना रहता है, यह समय 8 से 12 सप्ताह तक का हो सकता है। लॉन्ग कोविड में नीचे दिए गए लक्षण देखने को मिल सकते हैं :

  • सांस फूलना
  • कमजोरी
  • सिर दर्द
  • बुखार
  • सीने में दर्द
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
  • ब्रेन फॉग, और कुछ मामलों में डिप्रेशन भी 

लॉन्ग कोविड केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता, ये शरीर के दूसरे अंगों पर भी असर डालता है जैसे, ह्रदय, किडनी, दिमाग और पेट।

बुजुर्ग और महिलाएं जिन्हे कोविड संक्रमण के पहले सप्ताह 5 से ज्यादा लक्षण हुए हों उनमें लॉन्ग कोविड होने का खतरा बढ़ जाता है।

लॉन्ग कोविड क्या है?

लॉन्ग कोविड, जिसे पोस्ट कोविड, पोस्ट अक्यूट कोविड, लॉन्ग-टेल कोविड और लॉन्ग-हॉल कोविड भी कहा जाता है। ये वो परिस्थिति होती है जब कोविड का असर संक्रमण होने से लंबे समय तक बना रहता है, ये समय 8 से 12 सप्ताह तक का हो सकता है। लॉन्ग कोविड में नीचे दिए गए लक्षण देखने को मिल सकते हैं :

  • सांस फूलना
  • कमजोरी
  • सिर दर्द
  • बुखार
  • सीने में दर्द
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
  • ब्रेन फॉग, और कुछ मामलों में डिप्रेशन भी 

लॉन्ग कोविड केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता, ये शरीर के दूसरे अंगों पर भी असर डालता है जैसे, ह्रदय, किडनी, दिमाग और पेट।

बुजुर्ग और महिलाएं जिन्हे कोविड संक्रमण के पहले सप्ताह 5 से ज्यादा लक्षण हुए हों उनमें लॉन्ग कोविड होने का खतरा बढ़ जाता है।

जिन लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत है वो घर पर क्या कर सकते हैं?

सबसे पहले घबराने की जरूरत नहीं है। अगर आपका ब्लड ऑक्सीजन लेवेल 93 से कम है तो आपको चिंता हो सकती है और आपको ध्यान देने की जरूरत भी है। लेकिन जैसे कि विशेषज्ञों का कहना है, ऑक्सीजन इमबैलेंस होने पर सभी मरीजों को अस्पताल या इंटेंसिव केयर सपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती है।

मध्यम और हल्के कोविड वाले मरीज जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन सिलेंडर या कंसंट्रेटर का इस्तेमाल कर ठीक हो सकते हैं, खास तौर पर ऐसे वक्त में जब अस्पतालों में जगह मिलना आसान नहीं है।

ऑक्सीजन सिलेंडर का इस्तेमाल करें और प्रोनिंग टेक्नीक अपनाएं। पेट के बल लेटना प्रोनिंग कहलाता है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार, के अनुसार ऑक्सीजन और कंफर्ट बढ़ाने के लिए प्रानिंग चिकित्सकीय रूप से स्वीकृत है। अगर ऑक्सीजन लेवेल 94 से नीचे गिरता है, होम आइसोलेशन में रहने वाला संक्रमित व्यक्ति पेट के बल लेटकर अपना वेंटिलेशन बढ़ा सकता है क्योंकि इससे अल्वेओलार यूनिट्स (alveolar units) खुली रहती हैं। 

वैक्सीनेशन के बाद किन लोगों को साइड इफेक्ट होने की ज्यादा संभावना रहती है? यह कितने दिन तक रह सकते हैं?

वैक्सिनेशन के बाद साइड इफेक्ट होना आम बात है, इनमें कमजोरी आना, बांह में दर्द और सूजन, ठंड लगना और बुखार आना शामिल है। साइड इफेक्ट आम तौर पर हल्के होते हैं और ये लगभग 48 घंटों में खत्म हो जाते हैं। ये सिर्फ यही दर्शाता है कि आपके शरीर के इम्यून सिस्टम पर वैक्सीन का प्रभाव पड़ रहा है। इन लोगों को वैक्सीन के साइड इफेक्ट की अधिक संभावना रहती है :

1 युवा : क्योंकि युवाओं का इम्यून सिस्टम बहुत तेज होता है।

2 महिलाएं : फीमेल सेक्स हॉर्मोन एस्ट्रोजन (estrogen) इम्यून सिस्टम रेस्पॉन्स को बढ़ाता है वहीं मेल सेक्स हॉर्मोन टेस्टोस्टेरोन (testosterone) इम्यून सिस्टम रेस्पॉन्स को घटा सकता है।

3 वो लोग जिन्हें पहले कोविड हो चुका हो।

वैक्सीनेशन की दूसरी डोज के बाद : वैक्सीन के सर्वाधिक प्रभाव को पाने के लिए दूसरी डोज दी जाती है। इसके साइड इफेक्ट यही दर्शाते हैं कि आपका शरीर वायरस के खिलाफ प्रोटेक्शन बनाने में सक्षम है।

अगर आपको वैक्सीनेशन के बाद साइड इफेक्ट न हुआ हो तो?

हर व्यक्ति का वैक्सीन के प्रति इम्यून रिस्पांस अलग अलग है। अगर किसी व्यक्ति में साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिलते हैं तो इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि उनका इम्यून सिस्टम वैक्सीन को रिस्पॉन्स नहीं कर रहा। बिना साइड इफेक्ट वाले लोग भी एंटीबॉडी बनाने में सक्षम हैं।

आरटी-पीसीआर (RT-PCR) नेगेटिव आने पर चिकित्सक एक्स-रे, सीटी-स्कैन क्यों करवाते हैं?

एआईआईएमएस (AIIMS) की रिपोर्ट के अनुसार ,आरटी-पीसीआर (RT-PCR) से केवल 80 प्रतिशत केस में ही कोरोना वायरस पकड़ में आ रहा। बचे 20 प्रतिशत केस में नेगेटिव या गलत रिपोर्ट देखने को मिल रही। साथ ही अगर सैंपल सही से न लिया गया हो या टेस्ट बहुत जल्द किया गया है जब संक्रमण बहुत कम हो, तब टेस्ट के नतीजे नेगेटिव आ सकते हैं। इसी कारण सीटी स्कैन या एक्स-रे करवाया जाता है जिससे लक्षण और गंभीरता को शुरूआती स्तर पर पकड़ा जा सके और उसके अनुसार उपचार शुरू हो सके।

जिन्हें पहले कोविड हो चुका था वो लोग फिर से क्यों संक्रमित हो रहे हैं?

बहुत कम प्राकृतिक संक्रमण ऐसा इम्यून रिस्पॉन्स बनाते हैं जिससे संक्रमण दोबारा होने से पूरी तरह बचा जा सकता है। इसके विपरीत, आम तौर पर संक्रमण होने के महीनों बाद शरीर से संक्रमण खत्म होने पर इम्यून सिस्टम रिस्पॉन्स धीमा पड़ने लगता है।

इम्यून सिस्टम रिस्पॉन्स कमजोर पड़ने और इम्यूनिटी कम होने पर और सुरक्षा मानकों का ध्यान न रखने से संक्रमण दोबारा होने की संभावना बढ़ जाती है। वायरस के म्यूटेंट स्ट्रेन के कारण भी ऐसा संभव है। ये भी देखने की जरूरत है कि संक्रमण दोबारा हुआ है या पुराने संक्रमण का ही असर है। इंडियन काउन्सिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) का अध्ययन बताता है, 102 दिनों के अंतर में किए गए दो पॉजिटिव टेस्ट, जिसके बीच में एक नेगेटिव टेस्ट रहा हो, इसे कोविड-19 (SARS-CoV-2) का रीइंफेक्शन कहा जाएगा। ये अध्ययन भारतीय वैज्ञानिकों ने सर्विलांस सिस्टम को बनाने के लिए किया था।

क्या बच्चों में गंभीर कोविड-19 होने का खतरा होता है?

शिशु और बच्चे गंभीर खतरे में नहीं नजर आते। बहुत सारे बच्चों में हल्के लक्षण देखे गए या कोई लक्षण नहीं रहे। बहुत कम केसेस में नए कोरोना वायरस से बच्चों को गंभीर समस्या हो सकती है जैसे फेफड़ों में पानी भरना या ऑर्गन फेल होना। बच्चों में SARS-CoV-2 के कैरियर बनने का खतरा सबसे ज्यादा है। ये सुनिश्चित करने के लिए कि बच्चों से वायरस ना फैले, उनके हाथ लगातार साफ करवाना जरूरी है साथ ही उन्हें किसी भी संक्रमित व्यक्ति से दूर रखने की जरूरत है। इसके अलावा उन्हें मास्क पहने रहना भी जरूरी है। पहली वेव से अलग, इस बार भारत में, वायरस बच्चों को भी संक्रमित कर रहा है।

पहले स्ट्रेन की तुलना में दूसरा स्ट्रेन बच्चों के लिए क्यों अधिक चिंताजनक है?

पहली वेव से अलग, इस बार भारत में, वायरस बच्चों को भी संक्रमित कर रहा है। इस बार बच्चे बड़ों में सक्रमण फैलाने के लिए  जिम्मेदार हो सकते हैं। जबकि पहली वेव में, बहुत से बच्चे एसिम्टोमैटिक थे, इस बार, उनमें बुखार, बलगम, ड्राई कफ, डायरिया, उल्टी, कमजोरी, भूख न लगना, और अन्य सामान्य लक्षण देखने को मिल रहे हैं। कुछ को सांस लेने में भी समस्या आ सकती है वहीं कुछ बच्चों को अन्य किसी वायरल बुखार की तरह रैशेस की समस्या भी हो सकती है।

बच्चों में कोविड-19 के शुरूआती लक्षण क्या होते हैं?

ज्यादातर बच्चों में कोविड-19 के हल्के लक्षण होते हैं या उनमें कोई भी लक्षण नहीं देखा जा सकता। फिर भी बच्चों में गौर करने वाले शुरुआती लक्षण इस प्रकार हैं :

  • बुखार (100.4 °F या उससे ज्यादा)
  • सामान्य सर्दी जुकाम जैसे लक्षण जैसे गले में खराश, कफ, नाक बहना या बंद नाक
  • सांस लेने में समस्या
  • डायरिया, उल्टी आना या पेट में दर्द
  • सिर दर्द- दर्द तेज हो सकता है बुखार के साथ
  • मांसपेशियों में दर्द और थकान
  • ठंड लगना
  • स्वाद और महक न आना

अगर बच्चे का टेस्ट पॉजिटिव हुआ तो क्या करना चाहिए?

अगर आपके बच्चे का कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव आता है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। कोविड-19 से संक्रमित बहुत से बच्चों में हल्के लक्षण देखने को मिल रहे हैं और वो अपने आप ठीक भी हो रहे हैं। घर पर आपको अपने बच्चे में कोविड-19 के सामान्य लक्षणों को लगातार मॉनिटर करते रहना होगा। बच्चे को ज्यादा से ज्यादा तरल भोजन दें, अगर लक्षण हैं तो बुखार और दर्द की दवा देते रहें साथ ही सुनिश्चित करें कि बच्चे बेहतर नींद ले पाए।

  • बच्चे को घर पर रखें।
  • बच्चे की देखरेख करते वक्त खुद की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें, मास्क पहने और हाथ सैनेटाइज करते रहें।

अगर आप बच्चें में लक्षणों को बढ़ते देख रहे हैं जैसे, सांस लेने में समस्या, उल्टी या डायरिया, तेज बुखार तो तुरंत ही बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

कोविड-19 महामारी की दूसरी वेव में बच्चों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है?

  • हाथ धोते रहें- अपने बच्चों को साबुन और पानी से बीस सेकेंड तक हाथ धोना सिखाएं। बीच बीच में 60 प्रतिशत अल्कोहल वाला सैनेटाइजर भी इस्तेमाल करते रहें।
  • मास्क पहनें- पब्लिक में हों या आपके घर पर मेहमान आएं, आपको सुनिश्चित करना होगा कि आपके बच्चे सही तरीके से मास्क पहने रहें।
  • दूरी बनाए रखें- दूसरे लोगों के नजदीक जाने से बचें। ये भी सुनिश्चित करें कि बच्चे दूसरों से करीब 6 मीटर की दूरी बनाए रखें।
  • रेस्पिरेटरी एटिकेट्स सिखाएं- बच्चों को सिखाएं कि खांसते या छींकते वक्त उन्हें किस तरह टिशू से मुंह को ढकना चाहिए। इस्तेमाल किए हुए टिशू को कूड़ेदान में फेंककर हाथ धोना भी जरूरी है।

बच्चों को सुरक्षा के तरीके सिखाते रहें और रोजाना सुनिश्चित करें कि बच्चे उन मानकों का पूरी तरह पालन करें।

अगर बच्चे मास्क न पहने तो क्या करना चाहिए?

अगर आप देखते हैं कि आपका बच्चा लगातार मूवमेंट करता है और अपने चेहरे और मुंह को छूता रहता है तो आपको धैर्य से बात संभालनी होगी। इसलिए इन बातों को सिखाना जरूरी है :

  1. लगातार हाथ धोते रहे और हाथ धोते वक्त बच्चे की पसंदीदा राइम गाए जिससे ये एक फन एक्टिविटी बन जाए।
  2. फेस मास्क पहनते वक्त शीशे में देखें और बच्चों को बताएं कि ऐसा करने में कितना अच्छा लगता है।
  3. उनके पसंदीदा स्टफ्ड ऐनिमल को भी मास्क पहनाएं।
  4. उनसे उनके फेस मास्क को पेंट और रंगों से कस्टमाइज करवाएं।
  5. घर पर बच्चों के सामने फेस मास्क पहने रहें जिससे उन्हें इसकी आदत पड़ सके।

बच्चे बड़ों को देखकर सीखते हैं। इसलिए खुद घर पर हेल्दी एक्टिविटी करके बच्चों के लिए उदाहरण तैयार करें।

हम अभी एमआईएस-सी (MIS-C) के खतरे के बारे में क्या जानते हैं?

एमआईएस-सी (MIS-C) का मतलब बच्चों में मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेट्री सिंड्रोम है। ये एक गंभीर बीमारी है और ये कोविड-19 के कॉम्प्लिकेशन के रूप में सामने आ रही है।

कोविड-19 संक्रमित ज्यादातर बच्चों में बहुत हल्की बीमारी देखने को मिलती है। बहुत कम बच्चों में एमआईएस-सी (MIS-C) की स्थिति बनती है। शरीर के बहुत से अंग और टिशू जैसे ह्रदय, फेफड़े, ब्लड वेसेल, किडनी, डायजेस्टिव सिस्टम, ब्रेन, स्किन और आखों पर सीवियर इंफ्लेमेशन होता है।

एमआईएस-सी (MIS-C) के सामान्य तौर पर पाए जाने वाले लक्षण इस प्रकार है :

  • बुखार
  • पेट दर्द
  • उल्टी
  • डाएरिया
  • गर्दन दर्द
  • रैश
  • लाल आखें
  • ज्यादा थकान महसूस होना
  • हार्टबीट तेज होना
  • जल्दी जल्दी सांस लेना

अगर आप अपने बच्चे में इनमें से कोई भी लक्षण देखते हैं तो तुरंत ही बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। हालांकि आपको ये भी ध्यान रखना होगा कि सब बच्चों में एक से लक्षण नहीं होते।

चिकित्सक आपको कुछ लैबोरेट्री टेस्ट करवाने को बोल सकते हैं जैसे, चेस्ट एक्स-रे, ब्लड टेस्ट, पेट का अल्ट्रासाउंड, और हार्ट अल्ट्रासाउंड (echocardiogram) । ऐसे में आम तौर पर लक्षणों का उपचार किया जाता है जैसे डिहाइड्रेशन के लिए फ्लूड, इंफ्लेमेशन के लिए दवाइयां।

क्या धूप में रहने से कोविड-19 से मरने का खतरा कम हो जाता है?

मौसम कितना भी गर्म हो या सूरज निकला हो, फिर भी आपको कोविड-19 संक्रमण हो सकता है। बहुत से गर्म तापमान वाले देशों में भी कोविड-19 संक्रमण पाया गया है। अपने हाथ लगातार अच्छी तरह धोते रहें, साथ ही बिना धुले हाथों से अपनी आंखों, नाक, मुंह को छूने से बचें।

क्या पिछली बार से अलग, इस बार पूरा परिवार संक्रमित हो रहा है? परिवारों को ऐसे में क्या करना चाहिए? क्या हर किसी को अलग अलग क्वारेंटाइन होना चाहिए?

कोविड-19 की दूसरी वेव पूरे परिवार को संक्रमित कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है के किसी भी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों को तुरंत आइसोलेट हो जाना चाहिए। अगर पूरा घर पॉजिटिव होता है तो हर किसी को अलग अलग कमरे में क्वारेंटाइन होना चाहिए। अगर ऐसा संभव नहीं है तो घरवालों को एक दूसरे से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

सबको अपने अलग अलग बर्तन इस्तेमाल करने चाहिए, इससे घर से वायरस का लोड कम होगा और संक्रमण एक से दूसरे तक पहुंचने से बचेगा।

परिवार के सभी सदस्यों का रिकवरी टाइम और लक्षणों की गंभीरता अलग अलग हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप खुद को क्वारेंटाइन करें और सतर्कता बरतते रहें।

अगर परिवार के कई लोग बीमार हैं तो क्या वो एक दूसरे की मदद कर सकते हैं?

दूसरी वेव के कोविड-19 ने देश को बहुत नुक्सान पहुंचाया है। ज्यादा से ज्यादा लोग पॉजेटिव हो रहे हैं, और उनका पूरा परिवार खतरे में पड़ रहा है।

अगर एक ही समय में घर के कई सदस्य बीमार हैं तो उनको अलग अलग क्वारेंटाइन होने की सलाह दी जाती है क्योंकि अलग अलग लोगों में वायरल लोड अलग होगा। एक दूसरे की मदद कर सकते हैं लेकिन इसमें 6 फिट दूरी का ध्यान रखने की जरूरत है साथ ही हर वक्त मास्क पहनना भी जरूरी है। लेकिन जितना हो सके आत्मनिर्भर रहें।

एसिम्टोमैटिक मरीजों को क्या करना चाहिए?

पहले ये समझा जाता था कि केवल कोविड-19 के लक्षण (कफ, तेज बुखार या सांस लेने में परेशानी) वाले लोग ही संक्रमण को फैलाते हैं। लेकिन हालिया अध्ययन बताते हैं कि बिना लक्षण वाले एसिम्टोमैटिक मरीज भी वायरस फैलाते हैं।

इसलिए, आपके आसपास के लोगों की सुरक्षा के लिए, एसिम्टोमैटिक लोगों को नीचे दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए :

  1. खुद को आइसोलेट करें और परिवार के अन्य सदस्यों से दूरी बनाकर रखें।
  2. हर समय मास्क पहने रहें।
  3. अगर आप एक ही वॉशरूम या ट्वॉएलेट इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको इस्तेमाल करने के तुरंत बाद उसे डिसइंफेक्ट कर देना चाहिए। साथ ही उस फर्श और दरवाजे की कुंडी को भी साफ करें जिसे आपने छुआ हो।
  4. घर में घूमें नहीं। आपके परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि आप एक ही कमरे में बने रहें।
  5. साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें और लगातार हाथ धोते रहें।
  6. अपने फिजिशियन को लगातार अपने स्वास्थ्य की जानकारी देते रहें।

क्या नवजात शिशुओं को उनकी मां से कोविड-19 होने का खतरा है?

ऐसे बहुत कम केस हैं जिनमें जन्म के कुछ दिन बाद ही बच्चा कोविड-19 संक्रमित पाया गया। लेकिन इसका पता अभी नहीं चला है कि इन बच्चों को संक्रमण कैसे हुआ, संक्रमण जन्म से पहले का था, प्रसव के दौरान हुआ या जन्म लेने के बाद इसका पता नहीं चला है। नवजातों में हुआ कोविड-19 संक्रमण ज्यादातर अपने आप ठीक हो जाता है और ऐसे बच्चे हल्के लक्षणों वाले या बिना लक्षणों के होते हैं। नवजात में गंभीर कोविड-19 के बहुत कम केस हैं।अगर आपको कोविड-19 है तो अपनी स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें कि आप अपने नवजात के साथ रह सकती हैं या नहीं।

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